CAREER COUSELLING | IMPORTANCE OF CAREER COUSELLING |
कैरियर काउन्सलिंग का महत्त्व
आज से कुछ माह पूर्व भारत की विख्यात शिक्षण संस्थानों में से एक आईआईटी बेंगलुरु ने अपने होस्टल्स में विद्यार्थियों के कमरों से पंखें हटवा दिए, विद्यार्थियों का होस्टल की छतों पर जाना प्रतिबंधित कर दिया । क्यों ? क्योंकि आईआईटी जैसी संस्थानों में विद्यार्थियों द्वारा की जाने वाली आत्महत्याओं में निरन्तर वृद्धि हो रही है अतः उस वृद्धि पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा यह क्रांतिकारी निर्णय लिए गये । असल में देश में आई आई टी, आई आई एम, एन आई टी जैसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों की संख्या निरन्तर बढ़ रही है, उदाहरणार्थ - वर्ष 2021 में यह संख्या 7 थी, जो 2022 में बढ़कर 16 हो गयी और इस वर्ष में मार्च माह तक 6 विद्यार्थी इन संस्थानों में आत्महत्या कर चुके है । यद्यपि, यह आंकड़े तो इन प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के ही है जो शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किये गए है जबकि यह हाल देश के अन्य सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों के भी है । यद्यपि, वर्ष 2022 और 2023 के आंकड़े अब तक उपलब्ध नहीं है किंतु समस्या की गम्भीरता को समझने के लिये उपलब्ध आंकड़े भी पर्याप्त है । राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार वर्ष 2020 में भारत में विश्व के किसी भी राष्ट्र की तुलना में सर्वाधिक आत्महत्याएं हुई, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 12,526 थी जो कि वर्ष 2021 में बढ़कर 13089 हो गई । यद्यपि, ऐसा नहीं है कि इस समस्या की ओर सरकार का ध्यान नहीं है और वह कदम नहीं उठा रही । सरकारें इस दिशा में निःसन्देह प्रयास कर रही है । खैर, सरकार कुछ करें और हम कुछ न करें यह अनुचित ही है और सच कहूँ तो यह एक ऐसा विषय है जिसमें सरकार से अधिक अभिभावकों का योगदान आवश्यक है ।
यद्यपि, आत्महत्या का एक मूल कारण होता है मानसिक तनाव किन्तु उस मानसिक तनाव के मूल में बहुत से कारण हो सकते है । इन बहुत से कारणों में से एक है - विषय के प्रति बच्चों की अरूचि यानि LACK OF INTEREST । आप अपने आसपास दृष्टि डालकर देखेंगे तो पाएंगे कि हमारे आसपास मौजूद विद्यार्थियों में से अधिकांश इस समस्या से ग्रसित है, अतः कोई यह दबाव झेल जाता है तो कोई टूट जाता है और कुछ विद्यार्थी इतने टूट जाते है कि उनका तनाव अवसाद और सुसाइडल टेंडेंसी का रूप ले लेता है । ऐसी स्थिति में जब कोई उसे समझने और समझाने वाला न हो तब वह आत्महत्या जैसा दुष्कृत्य करने को विवश हो जाता है । अब प्रश्न यह उठता है कि जब किसी विद्यार्थी को किसी विषय मे इतनी अरुचि हो कि उसे पढ़ते हुए वह इतने दबाव में आ जाये कि आत्महत्या तक करने का प्रयास कर लें, तो कोई विद्यार्थी ऐसा विषय चुनता ही क्यों है, जिसमें उसकी रुचि नहीं है ? इसके मुख्यतः दो कारण हो सकते है - पहला पारिवारिक और सामाजिक दबाव अथवा प्रभाव तथा दूसरा स्वयं की रुचि अथवा प्रतिभा का ज्ञान न होना अथवा रुचि को रोज़गार में बदलने के मार्ग का ज्ञान न होना । पहले कारण की यदि बात करें तो वर्ष 2015 में एचएसबीसी के एक सर्वे के अनुसार भारत के 51% माता-पिता के लिये जीवन मे सर्वाधिक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह ही है उनकी सन्तान किसी अच्छे कॉलेज, स्कूल में पढ़कर एक अच्छा कैरियर बनाकर लाखों रुपये कमाने लगे । अब इसी दिशा में सोचने वाले कई माता-पिता अपने मित्रों, रिश्तेदारों अथवा शहर-मोहल्ले के किसी व्यक्ति को किसी एक क्षेत्र में सफलता प्राप्त किये देखकर आमतौर पर अभिभावक उससे प्रभावित हो जाते है और कई न कई यह मान लेते है कि हमारा बच्चा भी इसी क्षेत्र में कार्य करेगा तो निश्चित रूप से सफल होगा और बस बिना किसी अन्य विचार के वह बच्चे पर दबाव बनाकर उसे अपनी पसंद के विषय का चयन करने को विवश कर देते है । इसका एक ओर कारण यह भी है कि कई माता-पिता ऐसे भी होते है जिन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन में किसी विषय को पढ़ने का सोचा था किंतु आर्थिक अथवा पारिवारिक कारणों से पढ़ न सके तो वह अपने अधूरे ख्वाबों को अपने बच्चों के माध्यम से पूर्ण करने की कोशिश में बच्चों पर दबाव बनाते है । यद्यपि, अपने आसपास दृष्टि डालें तो आज के समय में जब शिक्षा और जागरूकता में निरंतर वृद्धि हो रही है तो देखने में आ रहा है कि आजकल माता-पिता द्वारा इस तरह का दबाव काफी कम दिया जाता है और अधिकांशतः निर्णय स्वयं विद्यार्थी के विवेक और उसके अध्यापकों आदि की सलाह पर छोड़ दिया जाता है ।
अब यहां से बात शुरू होती है हमारे दूसरे कारण की कि क्या विद्यार्थी स्वयं जो चयन करते है, वह सही होता है ? असल में हमारे यहां अधिकांशतः कक्षा के शीर्ष अंको वाले विद्यार्थी और न्यूनतम अंकों वाले विद्यार्थी में एक बात तो सामान्य ही पाई जाती है कि दोनों को ही अक्सर यह नहीं पता होता कि उन्हें आखिर जीवन मे करना क्या है ? उन्हें किस लक्ष्य की प्राप्ति करनी है अथवा किस विषय में अथवा क्षेत्र में उनकी उतनी रुचि है कि वह उसे अपना कैरियर बनाकर आजीवन उस क्षेत्र में कार्य कर सकें । एक वेबसाइट है edtechreview.in, जिसने वर्ष 2017 में एक शोध किया जिस शोध की रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल विद्यार्थियों में से 10% से भी कम विद्यार्थी ऐसे थे जिन्हें निश्चित तौर पर पता था कि उन्हें अपने बेहतर भविष्य के लिये किस क्षेत्र में शिक्षा अर्जित करनी है । इसी रिपोर्ट के अनुसार 60% से अधिक विद्यार्थी इस दुविधा महसूस करते है कि उन्हें कैरियर के लिये किस दिशा में जाना चाहिये । अब इस दुविधा के दो कारण है एक तो दसवीं कक्षा तक विद्यार्थी को इस दिशा में मार्गदर्शन नहीं मिल पाता कि वह अपनी रुचि और प्रतिभा को समझकर उसके अनुसार उच्च शिक्षा हेतु किसी विषय का चयन करें । साथ ही कई बार विद्यार्थी की रुचि जिस विषय में होती है उसे यह ज्ञान ही नहीं होता कि उस विषय में अथवा उस क्षेत्र में कोई कैरियर भी बनाया जा सकता है । इसे समझने के लिए वर्ष 2019 के एक शोध की रिपोर्ट देखते है जिसके अनुसार भारत में 14 से 21 वर्ष के विद्यार्थी कैरियर विकल्प के रूप में मात्र 7 विकल्प के बारे में ही जानते है जबकि विकासशील भारत में 250 से अधिक कैरियर विकल्प उपलब्ध है जहां विद्यार्थी एक सम्मानजनक क्षेत्र में कार्य कर स्वयं को और राष्ट्र को उन्नत कर सकता है । ऐसे में दुविधाओं से घिरा विद्यार्थी अपने किसी सहपाठी या गली, परिवार के किसी भैया-दीदी से प्रभावित होकर एक ऐसे विषय का चयन कर लेता है जिसमें उसकी स्वाभाविक रुचि नहीं होती । अतःआरम्भ में तो कुछ दिन वह उत्साह के साथ पढ़ता है, फिर वह विषय उस पर एक बोझ बन जाता है ।
किसी भी विद्यार्थी को इस अवसाद भरे जीवन में फंसने से बचाया जा सकता है यदि समाज द्वारा उनके लिये कैरियर काउंसलिंग की व्यवस्था की जाए । वैसे तो आमतौर पर जब भी विद्यार्थी किसी विषय के चयन के सम्बंध में उलझे हुए होते है तो माता-पिता अथवा अपने किसी बड़े भाई-बहन या रिश्तेदार के पास सलाह के लिए पहुंचते है लेकिन कई बार सलाह देने वाला व्यक्ति इतना प्रशिक्षित नहीं होता कि वह उस विद्यार्थी के सहज स्वभाव को, उसकी रुचि को और उस विषय को समान रूप से समझ सके जिसका चयन विद्यार्थी करना चाहता है । ऐसे में उन परिवारजनों द्वारा विद्यार्थी के बेहतर भविष्य की आस के साथ दी हुई सलाह भी निरर्थक अथवा भयावह सिद्ध होती है और विद्यार्थी एक गलत विषय का चयन कर उसमें उलझ जाता है । अतः आवश्यकता है कि जो विद्यार्थी इस तरह से दुविधाओं में हो उन तक प्रशिक्षित काउंसेलर द्वारा कैरियर काउन्सलिंग का विकल्प पहुंचाया जाये। इन दिनों विभिन्न विकल्प है जो कि आँनलाईन और ऑफलाईन उपलब्ध है जिनकी जानकारी आप गूगल से सहज ही प्राप्त कर सकते है ।
- योगेश गज्जा "अल्पज्ञ"
gajja.rtr@gmail.com



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