Malda Riots (Some Untouched Points) मालदा हिंसा (कुछ अनछुए पहलु)
नेताओं के बयानों से भ्रमित न हो भारतीय
हमारे भारत में गत 3 जनवरी को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में ढ़ाई लाख मुसलमानों के जुलूस ने हिंसक होकर 25 गाड़ियों को आग लगा दी, पुलिस वालों को पीटा, गोलियाँ चलाई और पुलिस थाने में भी तोड़-फोड़ कर काफी समय के लिये उस पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। सम्पूर्ण क्षेत्र में धारा 144 लगा दी गई और कुल 10 लोगो को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद भी हिंसा भड़की परन्तु उसे जल्दी ही नियन्त्रित कर लिया गया।
मालदा पश्चिम_बंगाल की ही तरह पुरनिया बिहार में भी हिंसा भड़की और कुछ गाड़ियों को आग के हवाले किया गया, गोलियाँ और पत्थर चलायें गये।इन दोनो ही घटनाओं में दो समानताएँ हैं। पहली तो यह कि दोनो घटनाओं के पीछे कारण बताया जा रहा हैं कि यह कमलेश तिवारी द्वारा 1 दिसम्बर 2015 को दिये गए बयान के विरूद्ध मुसलमानों का विरोध प्रदर्शन था। बिहार के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार बिहार में हुए प्रदर्शन में अधिकाँश लोग शान्तिपूर्ण विरोध कर रहे थे लोकिन अचानक कुछ लोग आक्रामक हो गए और पथराव करने लगे। धीरे-धीरे सम्पूर्ण प्रदर्शन हिंसक हो गया। इस बीच कई प्रदर्शनकारी शान्तिपूर्वक वहाँ से चले गए। दूसरी समानता यह ही हैं जो इन दोनो घटनाओं में दृष्टिगोचर हुई।
बिहार और बंगाल पुलिस की बात को यदि सच्चाई मानें तो यह घटनाएँ कई गम्भीर प्रश्न खड़े करती हैं? मुझे याद आता हैं कि आज से एक या दो वर्ष पूर्व आप की अदालत में रजत शर्मा द्वारा प्रश्न किये जाने पर राज ठाकरे साहब ने कहा था कि मुम्बई में हुए हिन्दु-मुस्लिम दंगों में आतंक मचाने वाले मुसलमानों में स्थानीय नागरिकों से अधिक वह घुषपैठियें थे जो बांग्लादेश से भारत में घुस आये थे। सम्भवतः बंगाल और बिहार में हुई घटनाओं में भी बांग्लादेशी घुषपैठियें ही सक्रिय रूप से विरोध प्रदर्शन को हिंसक करने में उनकी भूमिका अदा कर रहें हो। इस सम्भावना को झुठलाया नहीं जा सकता क्योंकि यदि पंजाब के एयरफोर्स बेस तक पाकिस्तानी घुसपैठियें पहुँच सकते हैं तो पश्चिम बंगाल और बिहार में बांग्लादेशी घुसपैठियें क्यों नहीं दाखिल हो सकते?
अब प्रश्न यह उठता हैं कि यदि कोई बांग्लादेशी घुसपैठ भारत में हिंसा करने के उद्देश्य से दाखिल भी हो गया हो तो हमारे पास उनकी पहचान करने के लिये कोई ठोस प्रक्रिया अथवा तरीका नहीं हैं, परन्तु उनके पास स्वयं को भारतीय सिद्ध करने के लिये कई विकल्प हैं, जैसे- राशन कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आई-डी कार्ड, बैंक पास-बुक, ड्राइविंग लाईसेंस आदि और सर्वाधिक आसानी से बनने वाला आधार कार्ड। हम सभी जानते हैं कि यदि वोटर आई-डी और राशन कार्ड को छोड़ दें तो अन्य पहचान प्रमाण आसानी से प्राप्त किये जा सकते हैं। आधार कार्ड तो न जाने किस किस का बन रहा हैं, स्वयं सरकार को भी नहीं पता होगा। खैर! जब तक देश में नेशनल_आई_डी_सिस्टम नहीं आयेगा तब तक देश में इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं किया जा सकता। अब, यदि उपर्युक्त घटनाओं के आतंकियों(बांग्लादेशी घुसपैठी) को पकड़ा गया और उसने निम्न में से कोई एक पहचान प्रमाण दिखा दिया तो पुलिस उसे भारतीय समझकर कार्यवाही तो करेगी परन्तु आम भारतीय में यह संदेश जायेगा कि भारतीय मुसलमान भारत में ही दंगा कर रहे हैं और इस तरह देश हिन्दु-मुसलमान के नाम पर विभाजित होने लगेगा।
जब तक देश में धर्म के नाम पर लड़ाई झगड़े होते रहेंगे, तब तक आम नागरिक देश की व्यवस्थाओं पर ध्यान केन्द्रित नहीं कर पायेगा। इसका फायदा सिर्फ भ्रष्ट राजनीतिज्ञों को ही मिलेगा। निःसन्देह जिन लोगों ने देश में हिंसा फैलाने का कार्य किया हैं, वह देशद्रोही हैं। लेकिन, नेताओं आदि की बातों से भ्रमित होकर हम सभी मुसलमानों को देशद्रोही कहें तो यह उचित नहीं हैं। कई विषय हैं जो इस विषयान्तर्गत लिखे जा सकते हैं, परन्तु पोस्ट को अधिक लम्बा न करते हुए, बस इतना कहकर पूर्णविराम लगाता हूँ कि हम भारतीय नागरिक भ्रष्ट नेताओं और तथाकथित राष्ट्रवादी और मुस्लिम संगठनों द्वारा दिये जा रहे बयानों से भ्रमित न होकर राष्ट्र के निर्माण में स्वयं का निःस्वार्थ योगदान दें।
श्री राज ठाकरे आप की अदालत में (लिंक)- https://www.youtube.com/watch?v=YacVATFN9WQ
वन्दें मातरम्।



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