डॉ जाकिरनाईक देश और सनातन धर्म के लिए खतरा
डॉ जाकिरनाईक देश और सनातन धर्म के लिए खतरा
इन दिनों भारतीय मीडिया में डॉ जाकिर नाईक के विषय में अत्यधिक प्रसारण किया जा रहा हैं। अधिकाँश समाचार चैनल पर चर्चाएँ चलाई जा रही हैं कि जाकिर नाईक आतंक को बढ़ावा देता हैं या नहीं? सुदर्शन न्यूज और जी न्यूज जैसे कुछ चैनलों को छोड़कर कोई भी चैनल यह स्पष्ट माँग नहीं कर रहा है कि डॉ नाईक के व्याख्यानों, एनजीओं, पुस्तकों, वेबसाईटों और सभाओं पर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगाया जायें। इन चैनलों पर होने वाली चर्चाओं और प्रसारित होने वाले समाचारों को देखकर ऐसा प्रतित होता हैं कि मुस्लिम समाज भी इस विषय पर दो भागों में विभाजित हो गया हैं, एक बड़ा भाग नाईक पर प्रतिबन्ध के समर्थन में हैं तो एक भाग ऐसा भी है जो इस राष्ट्रविरोधी डॉक्टर का पूर्ण समर्थन कर रहा हैं। ऐसा_क्यों?
यह मेरा दुर्भाग्य कहें या मूढ़मति की उपज कि गत कुछ वर्षों में मैने भी डॉ जाकिर को काफी सुना हैं। आरम्भ में अच्छा लगता था कि यह व्यक्ति इतना ज्ञानी है कि सभी धर्मों की पुस्तकें उसे याद हैं जिनके पृष्ठ, अध्याय, श्लोंक, वर्स आदि की संख्या भी आसानी से बता देता हैं। परन्तु, धीरे-धीरे समझ आने लगा कि उस व्यक्ति को किसी प्रकार का ज्ञान नहीं हैं, वह तो बस एक रट्टू तोते की तरह जो कुछ याद करता हैं, उन्हीं सीमित बातों को हर बार नया जामा पहनाकर पेश कर देता हैं। ओसामा बिन लादेन का खुलेआम समर्थन तो ओवैसी, आजम खाँ जैसे बेइमानों ने भी नहीं किया, जबकि यह नाईक अपनी सभाओं में लादेन को अातंकी मानने से स्पष्ट इंकार करता हैं। इस विषय में तो कोई दो राय नहीं हैं कि यह व्यक्ति देशद्रोही हैं और देश के लिए खतरा हैं।
हमारे भारत के लिए ही नहीं अपितु यह व्यक्ति सनातन धर्म के लिए भी खतरा हैं। जिस तरह से हमारे शास्त्रों को विकृत कर यह सभाओं में रखता हैं और जिस तरह से आस्थाविहीन हिन्दु युवक-युवती इसके झाँसे में आकर इस्लाम स्वीकार करते हैं, वह हमारे समाज के लिए चिन्ता का विषय हैं। असल में सनातन के विरूद्ध इस व्यक्ति की ताकत हैं हम सनातनियों को अपने शास्त्रों का ज्ञान न होना। वेद, उपनिषद्, पुराण, आदि तो दूर हमारे शहरों के अंग्रेजी पढ़े नौजवान भाई-बहनों में से अधिकाँश ने तो कभी श्रीमद्भगवद्गीता अथवा हनुमान चालिसा का भी पाठ नहीं किया होगा, ऐसे में इनकी उम्र बीत जाती हैं लेकिन सनातन के प्रति श्रद्धा उत्पन्न नहीं होती। ऐसे लोग जब लाखों की भीड़ में जाकिर के आत्मविश्वास भरी झूठी दलीले सुनते हैं तो प्रभावित होकर इस्लाम स्वीकार कर लेते हैं। आज, प्रतिबन्ध के नाम पर मीडिया जाकिर नाइक का प्रचार कर रहा हैं। कल तक जिस आदमी को सभी मुसलमान नही जानते थे, अब उसे देश का हर हिन्दु भी जानने लगेगा। यदि भविष्य में उस पर प्रतिबन्ध नही लगाया जाता तो उसकी सभाओं में भीड़ बढ़ेगी और अज्ञानी सनातनी युवाओं द्वारा इस्लाम स्वीकार करने की होड़ लग जायेगी।
हम भारतीय हैं और एक भारतीय होने के नाते मुझे किसी भी भारतीय (मन से और कर्म से) से परेशानी नहीं है, चाहे वह किसी भी धर्म का क्यों न हो। हमें तो गर्व होता हैं जब हम डॉ_कलाम और अमर शहीद अशफाक़ साहब जैसे महापुरूषों के बारे में पढ़ते हैं, परन्तु डॉ नाईक जैसे लोगो का समर्थन करना कतई सही नहीं हैं। यह व्यक्ति इस्लाम की आड़ में देश को और देश में रहने वाले नागरिकों को धोखा दे रहा हैं। इसका विरोध आवश्यक हैं।
विचार करें........
----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
वन्दे_मातरम्
हरे_कृष्ण



टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें