यह आलेख श्रीकृष्णभक्त श्रील प्रभुपादजी के शिष्य और Gaurang Institute of Vedic Education (http://www.ebay.in/usr/givegita) के संस्थापक श्रीवृन्दावनचन्द्रदासजी महाराज के सत्संगों से प्रेरित हैं।
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वर्तमान में हिन्दुत्व के नाम से विश्वभर में विख्यात हमारे सनातनधर्म में मृत्यु के पश्चात् होने वाली क्रियाओं में एक क्रिया है कि हम अर्थी को घर से लेकर शमशान तक अपने कंधों पर पहुँचाते हैं और इस बीच ईश्वर के नाम का उच्चारण करते हैं। अधिकाँशतः "राम नाम सत्य हैं" कहा जाता हैं तो जोधपुर के ब्राह्मण समाज सहित कुछ समाजों में "ओम नमः शिवाय" भी कहने की परम्परा है। खैर! किसी भी रूप में लिया जाये, ईश्वर का नाम लेना आवश्यक है। शवयात्रा में इस प्रकार ईश्वर के नाम का उच्चारण करने की परम्परा किसी शास्त्र में वर्णित है या नहीं, यह तो मैं नहीं जानता, परन्तु बुजुर्गों के अनुसार ऐसी मान्यता हैं कि मनुष्य के अन्तिम समय अर्थात् उसकी शवयात्रा में लिया गया 'हरि नाम' उसे स्वर्ग अथवा देवलोक की प्राप्ति करने में सहायता करता हैं अथवा उसे नर्क की प्रताड़नाओं से बचाता है।
यद्यपि, जानकारी के अभाव में अभी तो बस इतना ही कह सकता हूँ कि यह परम्परा #कलियुग के मनुष्य द्वारा आरम्भ हुई प्रतीत होती है। जीवन पर्यन्त हम धन, दौलत, ऐश्वर्य आदि के पीछे भागते हुए ईश्वर का ध्यान नहीं करते और मृत्यु के पश्चात् शव यात्रा में परीजनों द्वारा लिया गया ईश्वर नाम हमारे पापकर्मों को कुछ कम अवश्य करता होगा परन्तु क्या यह तमाम उम्र किये गुनाहों से हमें आजाद कर सकता हैं? नहीं। वर्तमान स्थितियों को देखते हुए तो ऐसा लगता है कि हम सम्पूर्ण जीवन धन, दौलत और ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति में लगा देते हैं और सिर्फ कुछ कर्मकाण्ड को छोड़कर ईश्वर भक्ति से दूर ही रहते है। हमारा ईश्वर भक्ति से दूर होने के कारण ही आज सनातन ध्रर्म में पाखण्डियों की संख्या बढ़ रही हैं। ऐसा सम्भव ही नहीं कि बिना भक्ति भाव के केवल मन्दिरों के दर्शन और गंगा स्नान से मोक्ष अथवा ईश्वर प्राप्ति हो, इन सभी कार्यों में ईश्वर के प्रति समर्पण भाव सर्वाधिक महत्वपूर्ण है जो कि आज देखने को कम ही मिलता हैं। ऐसा क्यों?
सन्तों द्वारा कहा गया है कि मनुष्य जन्म का उद्देश्य जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर भगवतधाम जाना हैं। ऐसे में पापकर्म इस लक्ष्य को पाने में बाधा बन सकते हैं और यह भी कहना सम्भव नहीं की मनुष्य आजीवन किसी प्रकार का पापकर्म करें ही नहीं। परन्तु, जब मनुष्य सही अर्थों में ईश्वर के शरणागत होकर क्षमायाचना करता है तो वह पापों से मुक्त भी हो सकता हैं और अन्ततः मनुष्य जीवन को सार्थक कर पुनः भगवतधाम पहुँचता हैं। इसी बात को भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं श्रीमद्भगवद्गीता में कहा हैं कि
 "सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः।।"(अ.18 श्लोक. 66)

मित्रों! आपके मन में यह प्रश्न अवश्य उठेगा कि इस पोस्ट को लिखने के पीछे औचित्य क्या हैं? इसका उत्तर बड़ा आसान है कि आज हम देख रहे है कि हमारे समाज के नागरिक आकस्मिक मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं और अधिकाँश की उम्र पचास-पचपन के बीच ही होती है तो कुछ युवा भी असमय काल का ग्रास बन रहे हैं। ऐसे में यह सोच हमारे लिये घातक सिद्ध हो सकती है कि 'भक्ति रिटायरमेंट के बाद करेंगे, तब तक सिर्फ नौकरी और घर-परिवार में मन लगाना हैं।' मृत्यु कब किस मार्ग से आ पहुँचे यह कोई नहीं कह सकता इसलिये उचित यही होगा कि समय रहते शास्त्रानुसार ईश्वरभक्ति कर लें क्योंकि घर से शमशान अधिक दूर नहीं है और रास्तें में परिजनों द्वारा लिया गया हरिनाम हमारे जन्मों के पापकर्मों के फल से मुक्त करने के लिये पर्याप्त नहीं होगा। मेरे स्वयं के घर से शमशान की दूरी अधिक नहीं है और आजकल तो कंधों पर उठाकर शमशान पहुँचाने की परम्परा भी कम हो रही हैं क्योंकि अब तो बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ आ चुकि 'शवपरिवहन सेवा' के नाम पर इसलिये अब पहले से भी कम समय लगेगा शमशान पहुँचने में, ऐसे में परिजन भी हरीनाम की एकमाला(108 जप) पूर्ण नहीं कर पायेंगे। काम वही आयेगा जो मैं अपने जीवन में करूँगा। सम्भवतः छोटा मूँह बड़ी बात लगे परन्तु मेरी राय तो यह ही होगी सभी पाठको से की जितना जल्दी हो सके ईश्वर भक्ति में लग जाये। हाँ, ज्ञात रहें कि ईश्वर भक्ति के लिये घर परिवार का त्याग कर हिमालय जाने की आवश्यकता नहीं हैं अपितु अपने घर परिवार में रहते हुए कृष्ण भक्ति करें और स्वयं के साथ-साथ अन्य सदस्यों को भी कृष्ण भक्ति हेतु प्रेरित करें। इस तरह हम जन्म, मृत्यु, जरा और व्याधी के भयंकर कष्ट से स्वयं को और अपने सुहृदों को मुक्त कर पुनः भगवतधाम की ओर प्रस्थान कर सकते हैं।

हरे कृष्ण।


(यदि इस आलेख को लिखने में किसी प्रकार कि कोई त्रुटि हो तो उसके लिये मैं सभी पाठकों से क्षमा चाहुँगा क्योंकि उस त्रुटि के लिये मैं स्वयं उत्तरदायी हूँ। साथ ही यदि कोई त्रुटि हो तो कृपया कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएँ। धन्यवाद)

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