What is SHIVLINGA | SHIVPURAN | शिवपुराण अनुसार शिवलिंग क्या है ?

शिवलिंग क्या है?


इन दिनों सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर कुछ तथाकथित धर्मगुरूओं एवं विद्वानों द्वारा सनातन धर्म के सम्बन्ध में भ्रम फैलाएँ जा रहे हैं । ऐसे ही कुछ भ्रम शिवलिंग के प्रति भी आमजन में प्रचलित हो रहे हैं । कई यूट्यूब चैनल पर यह भ्रान्ति फैलाई जा रही है, शिवलिंग का अर्थ 'penis of lord Shiva' है । जबकि यह भ्रान्त धारणा मात्र मलीन विचारधारा एवं शास्त्रीय ज्ञान के अभाव का परिचायक हैं । शिवलिंग क्या हैं और शिवलिंग पूजन का क्या अर्थ है उसके सम्बन्ध में श्रीशिवमहापुराण की विद्येश्वर संहिता के अध्याय संख्या 5 से अध्याय संख्या 8 में प्रमाण उपलब्ध हैं । अध्याय 5 से अध्याय 8 में ऋषियों द्वारा सूतजी महाराज से शिवलिंग पूजन का अर्थ एवं मर्म जानने के उद्देश्य एवं लोककल्याण की भावना से प्रश्न किया गया, जिसका उत्तर आप स्वयं इस पोस्ट में पढ़कर अपनी भ्रान्त धारण खत्म कर, सार्थक शास्त्रीय ज्ञान प्राप्त करें। 

      

 एक समय ऋषियों द्वारा सूतजी से प्रश्न किया गया कि - 'मूर्ति में ही सर्वत्र देवताओं की पूजा होती है, लिंग में नहीं। परन्तु, भगवान् शिव की सर्वत्र पूजा मूर्ति में और लिंग में भी क्यों की जाती है ?'
       सूतजी ने कहा- मुनीश्वरों! तुम्हारा यह प्रश्न बड़ा ही पवित्र है। इस विषय में महादेवजी ही वक्ता हो सकते है । दूसरा कोई भी कभी और कहीं भी इसका प्रतिपादन नहीं कर सकता । इस प्रश्न के समाधान के लिये भगवान् शिव ने जो कुछ कहा है और मैने गुरूजी के मुख से जिस प्रकार सुना है उसी तरह क्रमशः वर्णन करुँगा ।
          एकमात्र भगवान् शिव ही ब्रह्मरूप होने के कारण 'निष्कल' (निराकार) कहे गये हैं । रूपवान् होने के कारण उन्हें 'सकल' भी कहा गया है । इसलिये वे सकल और निष्कल दोनों हैं । शिव के निष्कल - निराकार होने के कारण ही उनकी पूजा का आधारभूत लिंग भी निराकार ही प्राप्त हुआ है । अर्थात् शिवलिंग शिव के निराकार स्वरूप का प्रतीक है । इसी तरह शिव के सकल या साकार होने के कारण उनकी पूजा का आधारभूत विग्रह साकार प्राप्त होता है । सकल और अकल  (समस्त अंग-आकारसहित साकार और अंग-आकार से सर्वथा रहित निराकार) रूप होने से ही वे 'ब्रह्म' शब्द से कहे जाने वाले 'परमात्मा' हैं । 

यहीं कारण है कि सब लोग लिंग (निराकार) और मूर्ति (साकार) दोनों में ही सदा भगवान् शिव की पूजा करते हैं ।

--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
उक्त जानकारी की जाँच हेतु कृपया गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीशिवमहापुराण का अध्ययन करें ।
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
शिवाय नमः

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट